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ईस्ट इंडिया कंपनी

ईस्ट इंडिया कंपनी एक ब्रिटिश व्यापारिक कंपनी थी, जिसकी स्थापना 1600 ईस्वी में इंग्लैंड की महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम के आदेश से की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारत और एशिया के अन्य देशों के साथ व्यापार करना था, विशेषकर मसाले, कपड़ा, चाय और अन्य वस्तुओं का व्यापार।

शुरुआत में यह कंपनी केवल व्यापार करती थी और भारत के तटीय क्षेत्रों में अपने व्यापारिक केंद्र (फैक्ट्री) स्थापित करती थी, जैसे सूरत, मद्रास (चेन्नई), बंबई (मुंबई) और कलकत्ता (कोलकाता)। लेकिन धीरे-धीरे कंपनी ने अपनी सैन्य शक्ति और राजनीतिक चालों के माध्यम से भारत में अपना प्रभाव बढ़ाना शुरू किया।

प्लासी का युद्ध (1757) और बक्सर का युद्ध (1764) कंपनी के लिए निर्णायक साबित हुए। इन युद्धों के बाद कंपनी ने बंगाल, बिहार और उड़ीसा पर नियंत्रण स्थापित कर लिया। इसके बाद कंपनी ने धीरे-धीरे पूरे भारत पर अपना अधिकार बढ़ा लिया।

ईस्ट इंडिया कंपनी केवल व्यापारिक संस्था नहीं रही, बल्कि एक शक्तिशाली शासक बन गई। उसने भारत में कर वसूली, प्रशासन और कानून व्यवस्था का संचालन भी अपने हाथ में ले लिया। हालांकि, कंपनी के शासन में भारतीय जनता का शोषण हुआ, जिससे असंतोष बढ़ा।

अंततः 1857 का विद्रोह के बाद 1858 में ब्रिटिश सरकार ने कंपनी का शासन समाप्त कर दिया और भारत को सीधे अपने नियंत्रण में ले लिया। इस प्रकार ईस्ट इंडिया कंपनी का अंत हुआ।