भारत सरकार ने मितव्ययिता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की अपील को अमल में लाते हुए केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इन फैसलों का असर सिर्फ सरकारी कामकाज पर ही नहीं, बल्कि किसानों और आम लोगों पर भी देखने को मिलेगा।
कृषि मंत्रालय ने बदली कार्यप्रणाली
नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में खर्च कम करने और डिजिटल कार्यप्रणाली को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। बैठक में तय किया गया कि गुवाहाटी और विशाखापट्टनम में होने वाली जोनल कृषि कॉन्फ्रेंस अब वर्चुअल मोड में आयोजित की जाएंगी।
सरकार का मानना है कि इससे यात्रा, होटल और आयोजन पर होने वाला भारी खर्च बचाया जा सकेगा। साथ ही डिजिटल व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
कर्मचारियों के लिए लागू होगा Work From Home
मंत्रालय ने लगभग 20 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए रोटेशनल वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है। इससे कार्यालयों में भीड़ कम होगी और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा मिलेगा।
सरकार का कहना है कि भविष्य में प्रशासनिक कामकाज को अधिक स्मार्ट और तकनीक आधारित बनाया जाएगा।
बिजली और ईंधन बचाने पर फोकस
बैठक में ऊर्जा बचत को लेकर भी सख्त निर्देश दिए गए। अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा गया है कि जरूरत न होने पर लाइट, पंखे, एसी और कंप्यूटर बंद रखें।
इसके अलावा सप्ताह में एक दिन कार-पूलिंग व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई गई है। सरकारी वाहनों के उपयोग में भी लगभग एक-तिहाई कटौती का लक्ष्य रखा गया है। इससे पेट्रोल-डीजल की बचत होगी और सरकारी खर्च कम होगा।
केवल जरूरी सरकारी यात्राएं होंगी
अब मंत्रालयों में सिर्फ आवश्यक सरकारी दौरों को ही मंजूरी मिलेगी। जहां संभव होगा, वहां बैठकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित किया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य समय, संसाधन और सरकारी धन की बचत करना है।
अफसरों का बड़ा संकल्प: एक साल तक नहीं खरीदेंगे सोना
बैठक का सबसे चर्चित फैसला अधिकारियों के स्वैच्छिक संकल्प से जुड़ा रहा। अधिकारियों ने विशेष परिस्थितियों को छोड़कर एक वर्ष तक सोना नहीं खरीदने का फैसला लिया है।
इसे मितव्ययिता, आत्मसंयम और आर्थिक अनुशासन से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि ऐसे कदम देश में बचत और जिम्मेदार खर्च की भावना को मजबूत करेंगे।
किसानों के लिए शुरू होगा “खेत बचाओ अभियान”
कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए सरकार ने “खेत बचाओ अभियान” शुरू करने का फैसला लिया है। इसके तहत वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर मिट्टी की जांच करेंगे और किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग की सलाह देंगे।
इस अभियान का उद्देश्य खेती की लागत कम करना और जमीन की उर्वरता को सुरक्षित रखना है।
खाद्य तेल कम खाने और प्राकृतिक खेती पर जोर
सरकार अब लोगों को कम खाद्य तेल इस्तेमाल करने के लिए जागरूक करेगी ताकि स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिल सके।
इसके साथ ही प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 28 और 29 मई को होने वाली खरीफ कॉन्फ्रेंस में संतुलित खाद उपयोग और प्राकृतिक खेती पर विशेष चर्चा होगी।
राज्यों के साथ मिलकर ऐसी रणनीति तैयार की जाएगी जिससे किसानों की आय बढ़े और खेती अधिक टिकाऊ बन सके।
सरकार का क्या है लक्ष्य?
सरकार का कहना है कि इन फैसलों से प्रशासनिक खर्च कम होगा, डिजिटल कार्यप्रणाली मजबूत होगी और कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही किसानों की लागत घटाने और पर्यावरण संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।








