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कुतुबुद्दीन ऐबक

कुतुबुद्दीन ऐबक मध्यकालीन भारत के एक महत्वपूर्ण शासक थे और दिल्ली सल्तनत के संस्थापक माने जाते हैं। उन्होंने 1206 ईस्वी में भारत में मुस्लिम शासन की औपचारिक शुरुआत की। वे मूल रूप से तुर्क थे और पहले मोहम्मद गौरी के दास (slave) और सेनापति थे, लेकिन अपनी योग्यता और वीरता के कारण उन्होंने उच्च पद प्राप्त किया।

मोहम्मद गौरी की मृत्यु के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने भारत में स्वतंत्र रूप से शासन करना शुरू किया और दिल्ली सल्तनत की नींव रखी। उनके शासनकाल में उन्होंने प्रशासन को मजबूत किया और अपने राज्य का विस्तार किया। वे अपनी उदारता के लिए प्रसिद्ध थे, इसलिए उन्हें “लाख बख्श” (लाखों का दान देने वाला) कहा जाता था।

कुतुबुद्दीन ऐबक ने स्थापत्य कला के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने दिल्ली में कुतुब मीनार का निर्माण शुरू कराया, जो आज भारत की एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहर है। इसके अलावा उन्होंने कई मस्जिदों का भी निर्माण करवाया।

उनकी मृत्यु 1210 ईस्वी में लाहौर में पोलो खेलते समय घोड़े से गिरने के कारण हुई। उनका शासनकाल भले ही छोटा था, लेकिन उन्होंने भारत में एक नए युग की शुरुआत की।

संक्षेप में, कुतुबुद्दीन ऐबक एक वीर, उदार और दूरदर्शी शासक थे, जिन्होंने दिल्ली सल्तनत की स्थापना कर मध्यकालीन भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।