हड़प्पा सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख और प्राचीन नगर था, जिसकी खोज 1921 ई. में हुई थी। यह वर्तमान में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है। हड़प्पा को इस सभ्यता का पहला खोजा गया स्थल माना जाता है, इसलिए पूरी सभ्यता को ही “हड़प्पा सभ्यता” भी कहा जाता है।
हड़प्पा नगर अपनी सुव्यवस्थित नगर योजना के लिए प्रसिद्ध था। यहाँ की सड़कों का निर्माण सीधी रेखाओं में किया गया था और वे एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, जिससे पूरा शहर ग्रिड प्रणाली पर आधारित था। घर पक्की ईंटों से बने होते थे और लगभग हर घर में स्नानघर तथा जल निकासी की उन्नत व्यवस्था थी। यह दर्शाता है कि उस समय के लोग स्वच्छता और सुव्यवस्थित जीवन पर विशेष ध्यान देते थे।
हड़प्पा में किलेबंदी (Citadel) और निचला नगर (Lower Town) दो भागों में विभाजन पाया जाता है। किलेबंदी क्षेत्र में प्रशासनिक और धार्मिक गतिविधियाँ होती थीं, जबकि निचले नगर में आम लोग रहते थे। यहाँ बड़े-बड़े अनाज भंडार (Granaries) भी मिले हैं, जो यह संकेत देते हैं कि कृषि और भंडारण की व्यवस्था काफी विकसित थी।
हड़प्पा के लोग कृषि, पशुपालन और व्यापार में निपुण थे। वे गेहूँ, जौ जैसी फसलें उगाते थे और बैल, भैंस, भेड़-बकरी आदि पशु पालते थे। व्यापार के लिए वे दूर-दराज के क्षेत्रों, यहाँ तक कि मेसोपोटामिया तक संपर्क रखते थे। खुदाई में मिली मुहरें (Seals), आभूषण, मिट्टी के बर्तन और तांबे के औजार उनके विकसित शिल्प और कला को दर्शाते हैं।
हड़प्पा से प्राप्त लिपि अभी तक पूरी तरह पढ़ी नहीं जा सकी है, जिससे उनके सामाजिक और धार्मिक जीवन के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिल पाई है। फिर भी मुहरों और मूर्तियों से यह पता चलता है कि वे प्रकृति और देवी-देवताओं की पूजा करते थे।
संक्षेप में, हड़प्पा एक उन्नत, संगठित और समृद्ध नगर था, जिसने प्राचीन भारतीय सभ्यता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आज भी इतिहासकारों के लिए शोध का एक महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।