पाषाण युग मानव इतिहास का सबसे प्राचीन काल माना जाता है। इस युग में मानव ने पत्थरों से बने औजारों का उपयोग करना सीखा। यही कारण है कि इस काल को पाषाण युग कहा जाता है। यह युग मानव सभ्यता की नींव है, क्योंकि इसी समय मनुष्य ने शिकार करना, आग का उपयोग करना और समूह में रहना शुरू किया।
पाषाण युग का अर्थ
“पाषाण” का अर्थ है पत्थर और “युग” का अर्थ है काल। इस प्रकार पाषाण युग वह समय था जब मनुष्य के जीवन में पत्थर के औजारों का प्रमुख स्थान था। उस समय धातुओं का ज्ञान नहीं था, इसलिए पत्थर ही मुख्य साधन थे।
पाषाण युग के प्रमुख प्रकार
इतिहासकारों ने पाषाण युग को तीन भागों में बाँटा है। यह विभाजन औजारों की बनावट और मानव जीवन शैली के आधार पर किया गया है।
पुरापाषाण युग
पुरापाषाण युग पाषाण युग का सबसे प्राचीन चरण था। इस काल में मनुष्य पूर्णतः शिकारी और भोजन संग्रह करने वाला था। लोग गुफाओं में रहते थे और कच्चे, खुरदरे पत्थर के औजारों का उपयोग करते थे। आग की खोज इसी युग की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
मध्यपाषाण युग
मध्यपाषाण युग संक्रमण काल माना जाता है। इस समय औजार पहले से छोटे और नुकीले बनने लगे थे। मनुष्य ने मछली पकड़ना, धनुष-बाण का प्रयोग और अस्थायी निवास बनाना शुरू किया। इस युग में मानव जीवन थोड़ा अधिक व्यवस्थित हुआ।
नवपाषाण युग
नवपाषाण युग को मानव इतिहास की क्रांति कहा जाता है। इस काल में मनुष्य ने कृषि करना, पशुपालन और स्थायी जीवन की शुरुआत की। चिकने और पॉलिश किए हुए पत्थर के औजारों का प्रयोग होने लगा। बर्तन निर्माण और कपड़ा बुनाई जैसी गतिविधियाँ भी इसी युग में विकसित हुईं।
पाषाण युग की प्रमुख विशेषताएँ
पाषाण युग की सबसे बड़ी विशेषता पत्थर के औजारों का प्रयोग था। इस युग में मनुष्य प्रकृति पर पूरी तरह निर्भर था। सामाजिक जीवन की शुरुआत, भाषा का प्रारंभिक विकास और कला के रूप में गुफा चित्र इसी काल की महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं।
पाषाण युग का ऐतिहासिक महत्व
पाषाण युग ने मानव सभ्यता की दिशा तय की। कृषि, पशुपालन और स्थायी बस्तियों की नींव इसी युग में पड़ी। आज की उन्नत सभ्यता की जड़ें पाषाण युग के प्रयोगों और अनुभवों में ही छिपी हैं।