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प्रागैतिहासिक काल: मानव सभ्यता की शुरुआत का इतिहास

प्रागैतिहासिक काल

प्रागैतिहासिक काल क्या है?

प्रागैतिहासिक काल वह समय है, जब मानव ने लिखना नहीं सीखा था। इस काल के बारे में जानकारी हमें लिखित दस्तावेजों से नहीं, बल्कि पुरातात्विक साक्ष्यों जैसे—पत्थर के औजार, गुफा चित्र, अस्थियाँ और अवशेषों से मिलती है। मानव इतिहास की यह सबसे प्रारंभिक अवस्था मानी जाती है।

प्रागैतिहासिक काल की समय-सीमा

प्रागैतिहासिक काल की कोई निश्चित तिथि नहीं है, लेकिन सामान्य रूप से यह काल मानव के पृथ्वी पर आगमन से लेकर लिपि के आविष्कार तक फैला हुआ माना जाता है। इस काल में मानव ने धीरे-धीरे शिकार, भोजन संग्रह और औजार निर्माण जैसी गतिविधियाँ विकसित कीं।

प्रागैतिहासिक काल के प्रमुख चरण

इतिहासकारों ने प्रागैतिहासिक काल को मुख्य रूप से तीन भागों में बाँटा है—पुरापाषाण काल, मध्यपाषाण काल और नवपाषाण काल। ये विभाजन मानव द्वारा उपयोग किए गए औजारों और जीवन-शैली के आधार पर किए गए हैं।

पुरापाषाण काल

पुरापाषाण काल को प्रागैतिहासिक काल का सबसे प्राचीन चरण माना जाता है। इस काल में मानव खानाबदोश जीवन जीता था और शिकार तथा फल-फूल संग्रह पर निर्भर था। पत्थर के खुरदरे औजारों का उपयोग इस काल की प्रमुख विशेषता थी।

मध्यपाषाण काल

मध्यपाषाण काल संक्रमण का काल था। इस समय मानव ने छोटे और नुकीले औजार बनाना शुरू किया। शिकार की तकनीक में सुधार हुआ और मानव ने समूहों में रहना प्रारंभ किया। इस काल में पशुपालन की शुरुआती प्रवृत्तियाँ भी दिखाई देती हैं।

नवपाषाण काल

नवपाषाण काल को मानव सभ्यता के विकास में क्रांतिकारी चरण माना जाता है। इस समय मानव ने कृषि करना सीखा और स्थायी निवास बनाने लगा। चिकने और धारदार पत्थर के औजारों का प्रयोग बढ़ा तथा मिट्टी के बर्तनों का निर्माण भी इसी काल में शुरू हुआ।

प्रागैतिहासिक काल की कला

प्रागैतिहासिक मानव ने गुफाओं की दीवारों पर चित्र बनाए, जिन्हें शैलचित्र कहा जाता है। इन चित्रों में शिकार, पशु और दैनिक जीवन की गतिविधियाँ दर्शाई गई हैं। ये चित्र मानव की रचनात्मक क्षमता का प्रमाण हैं।

प्रागैतिहासिक काल का महत्व

प्रागैतिहासिक काल ने मानव सभ्यता की नींव रखी। इसी काल में मानव ने आग का उपयोग, औजार निर्माण, सामाजिक जीवन और कृषि जैसी महत्वपूर्ण खोजें कीं, जिनके आधार पर आगे चलकर विकसित सभ्यताओं का निर्माण हुआ।