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पुरापाषाण काल: समय-सीमा, विशेषताएँ और महत्व

पुरापाषाण काल

पुरापाषाण काल मानव इतिहास का सबसे प्राचीन काल माना जाता है। यह वह समय था जब मानव ने पहली बार प्रकृति के साथ संघर्ष करते हुए जीवन जीना शुरू किया। इस काल में मनुष्य पूर्णतः शिकारी और खाद्य-संग्रहकर्ता था तथा उसका जीवन जंगलों, गुफाओं और खुले मैदानों में बीतता था। “पुरापाषाण” शब्द का अर्थ है – पुराना पत्थर, क्योंकि इस युग में उपयोग किए जाने वाले औजार मुख्य रूप से पत्थर के बने होते थे।

इतिहासकारों के अनुसार पुरापाषाण काल की शुरुआत लगभग 25 लाख वर्ष पूर्व हुई और यह लगभग 10,000 ईसा पूर्व तक चला। इस लंबे समय को तीन भागों में विभाजित किया जाता है – निम्न पुरापाषाण काल, मध्य पुरापाषाण काल और उच्च पुरापाषाण काल। प्रत्येक चरण में मानव की जीवनशैली और औजारों में धीरे-धीरे विकास देखने को मिलता है।

पुरापाषाण काल में मानव का जीवन अत्यंत कठिन था। वह स्थायी निवास नहीं करता था बल्कि भोजन की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर घूमता रहता था। मनुष्य गुफाओं, पेड़ों की छाया या अस्थायी झोपड़ियों में रहता था। इस काल में परिवार या समाज की स्पष्ट संरचना नहीं थी, बल्कि छोटे-छोटे समूहों में लोग रहते थे।

इस युग में मानव का मुख्य भोजन शिकार किए गए जानवरों का मांस, फल, कंद-मूल और जंगली वनस्पतियाँ थीं। खेती और पशुपालन का ज्ञान नहीं था। भोजन पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर था, इसलिए जीवन असुरक्षित और अनिश्चित माना जाता है।

पुरापाषाण काल की सबसे बड़ी विशेषता पत्थर के औजार हैं। प्रारंभ में मानव मोटे और असंस्कृत पत्थरों का उपयोग करता था, लेकिन धीरे-धीरे उसने पत्थरों को तराशना सीख लिया। हाथ कुल्हाड़ी, खुरपी, फलक और भाला जैसे औजार इसी काल में विकसित हुए। ये औजार शिकार, जानवरों की खाल उतारने और आत्मरक्षा में काम आते थे।

पुरापाषाण काल की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अग्नि का उपयोग था। आग से मानव को गर्मी मिली, जंगली जानवरों से सुरक्षा मिली और भोजन पकाने की शुरुआत हुई। इससे मानव के जीवन में बड़ा परिवर्तन आया और वह धीरे-धीरे अधिक संगठित जीवन की ओर बढ़ा।

इस काल के अंतिम चरण में गुफा चित्रकला का विकास हुआ। गुफाओं की दीवारों पर जानवरों, शिकार और दैनिक जीवन से जुड़े चित्र बनाए गए, जो मानव की कलात्मक चेतना को दर्शाते हैं। माना जाता है कि मानव प्रकृति की शक्तियों से डरता था और उनमें आस्था रखता था, जिससे प्रारंभिक धार्मिक भावनाओं का विकास हुआ।

भारत में पुरापाषाण काल के प्रमाण भी मिले हैं। भीमबेटका की गुफाएँ, नर्मदा घाटी, सोन घाटी और बेलन नदी क्षेत्र से इस काल के औजार और अवशेष प्राप्त हुए हैं। ये साक्ष्य बताते हैं कि भारत में मानव जीवन अत्यंत प्राचीन काल से मौजूद था।

पुरापाषाण काल मानव सभ्यता की नींव है। इसी काल में मानव ने औजार बनाना, आग का उपयोग करना और सामूहिक जीवन जीना सीखा। आगे चलकर यही अनुभव मध्यपाषाण और नवपाषाण काल के विकास का आधार बना।

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